Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 96, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
कर्म बीजं मनःस्पन्दः कथ्यतेऽथानुभूयते ।
क्रियास्तु विविधास्तस्य शाखाश्चित्रफलास्तरोः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
उस वासनारूपी वृक्ष का
कर्म बीज है, मन की गति शरीर है ओर सुखदुःख आदि फल देनेवाली विविध क्रियाएँ उसकी
शाखाएँ हैं, यह शास्त्र में कहा जाता है और फलतः इसका अनुभव भी होता है