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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 96, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

या येन वासना यत्र सतेवारोपिता यथा । सा तेन फलसूस्तत्र तदेव प्राप्यते तथा ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे यहाँ पर स्थित ही एेन्दवों ने हम लोग सत्य लोकमें स्थित हैं, ऐसी कल्पना की थी वैसे ही जिससे जहाँपर जिस वासना का जैसे आरोप किया जाता है, वहाँ पर फल देनेवाली उस वासना की कल्पनाओं से यह विश्व व्याप्त है, यह स्पष्ट हुआ