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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 96, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

भावनामनुसंधानं यदा निश्चित्य संस्थिता । तदैषा प्रोच्यते बुद्धिरियत्ताग्रहणक्षमा ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

॥ उक्त शुद्ध चेतन जब पहले ही या विकल्प के बाद विशेष भावना प्राप्त कर उक्त विकल्पकी दो कोटियों में से एक कोटिके अनुसन्धान का निश्चय कर सुस्थिर हो स्थित होता है, तब यह वस्तु ऐसी ही है, इस प्रकार का निर्धारण करने में समर्थ "बुद्धि" नाम से कहा जाता है