Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 96, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
यदा मिथ्याभिमानेन सत्तां कल्पयति स्वयम् ।
अहंकाराभिमानेन प्रोच्यते भवबन्धनी ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जब तुच्छ देह आदि में आत्माभिमान करने से अपनी सत्ता मानता है, तब अभिमान से
“अहंकार' कहा जाता है। अहंकार ही सकल अनर्थो का मूल होनेसे संसार में बन्धन करनेवाला
है