Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 96, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
पूर्वदृष्टमदृष्टं वा प्राग्दृष्टमिति निश्चयैः ।
यदैवेहां विधत्तेऽन्तस्तदा स्मृतिरुदाहृता ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जब शुद्ध चेतन जो पहले देखा गया हो
अथवा न देखा गया हो, उसकी "पहले मैंने इसे देखा है” इस निश्चय से हदयमें अभिलाषा
करता है, तब सृति (संसृति) नामसे कहा गया है