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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 96, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

यदा पदार्थशक्तीनां संभुक्तानामिवाम्बरे । वसत्यस्तमितान्येहा वासनेति तदोच्यते ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

जब शुद्ध चेतन तिरोभूत हुई पद, पदार्थ ओर उनकी शक्तियों के स्वरूप से शून्यप्राय अति सूक्ष्मभावमें रहता है और उसकी अन्य चेष्टाओंका अन्त हो जाता है, तब वह “वासना” नामसे ख्यात होता है