Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 96, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
जीवो मनश्च ननु बुद्धिरहंकृतिश्चेत्येवं प्रथामुपगतेयमनिर्मला चित् ।
सैषोच्यते जगति चेतनचित्तजीवसंज्ञागणेन किल नास्ति विवाद एषः ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ को स्पष्ट करते हुए उपसंहार करते हैं ।
यह मलिन चेतन ही जीव, मन, बुद्धि, अहंकार इन रूपों से ख्याति को प्राप्त हुआ है, वही
इस जगत् में चेतन, चित्त और जीव संज्ञाओंसे कहा जाता है । जो वस्तु है, वह विवाद का
विषय नहीं है, केवलमात्र नाम और कल्पना में विवाद है