Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 97, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 97 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
ब्रह्मन्मनस एवेदमन्तश्चाडम्बरं सृतम् ।
यतस्तदेव कर्मेति वाक्यार्थादुपलभ्यते ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
होता हे