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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 97, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 97 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

एकमेव परं ब्रह्म सर्व सर्वावपूरकूम् । प्रबुद्धविषयं नित्यं कलाकलनवर्जितम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

प्रबुद्ध पुरुषों की दृष्टि में तो सब प्रकारकी कल्पनाओंसे रहित, सर्वव्यापक, सर्वात्मक तीनों कालों में एकरस एकमात्र परम ब्रह्म ही विराजमान है