Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 97, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 97 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
द्वैताद्वैतसमुद्भेदैर्वाक्यसंदर्भगर्भितैः ।
उपदेश्यत एवाज्ञो न प्रबुद्धः कथंचन ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
विविध
वाक्यसन्दर्भोसे परिपूर्ण द्रैत और अद्वैत के भेदोंसे अज्ञानी पुरुषको ही उपदेश दिया जाता है,
ज्ञानी जनको कदापि नहीं