Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
यत्तत्करञ्जगहनं तत्कलत्ररसं विदुः ।
दुःखकण्टकसंबाधं मानुष्यं विविधैषणम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जो वह करौदे का वन है, उसे कुटुम्बस्नेह से युक्त, दुःखरूपी कण्टकों
से व्याप्त तथा पुत्रैषणा, वित्तैषणा और लोकेषणा से पूर्ण मनुष्यजन्म कहते हैं