Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
करञ्जगहनं यानि प्रविष्टानि मनांसि तु ।
मानुष्ये तानि जातानि तत्रैव रसिकानि च ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जो
मन करदे के वन में प्रविष्ट कहे गये हैं, उन मनों को आप मनुष्ययोनि में उत्पन्न हुए ओर
वहीं पर रमे हुए यानी विषयों के स्वादमें तत्पर हुए जानिये