Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
कदलीकाननं यत्तच्छशाङ्ककरशीतलम् ।
तन्मनोह्लादनकरं स्वर्गं विद्धि रघूद्वह ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे रघुकुलदीपक, चन्द्रमा
की किरणों की नाई शीतल जो कदलीवन पीछे कहा गया है, उसे चित्त को प्रसन्न करनेवाला
स्वर्ग जानिये