Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
कानिचित्पुण्यभूतेन तपसा धारणात्मना ।
धारयन्ति शरीराणि संस्थितान्युदितान्यपि ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
उनमें से कई एक मन शास्त्र द्वारा विहित, ध्येय तत्त्व में मन लगानारूप
धारणाप्रधान उपासनात्मक तपसे ग्रह, सप्तर्षि, धुव आदिका शरीर धारण करते हैं, वे औरों
की अपेक्षा तेज और भोग की अधिकता से और तत्त्वज्ञानसे अभ्युदययुक्त होकर चिरकाल
से स्थित हैं