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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

रुदताङ्गानि दृष्टानि कारुण्येनावबोधिना । कष्टमेतानि संत्यज्य किं प्रयामीति चेतसा ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

बड़े खेद की बात है, इन अंगोंका परित्याग कर कहाँ जाऊँ, यों रो रहे थोड़े बहुत विवेक को प्राप्त हुए मनने बड़ी करुणा से अपने अंग देखे