Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अर्धप्राप्तविवेकस्य न प्राप्तस्यामलं पदम् ।
चेतसस्त्यजतोऽङ्गानि परितापो हि वर्धते ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसे आधा विवेक प्राप्त हो गया है, निर्मल पद प्राप्त नहीं
हुआ, ऐसे चित्त को अपने स्नेह, लोभ आदि अंगों का त्याग करते बड़ा परिताप होता है