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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

हसितं तु यदानन्दि पुंसा मदवबोधतः । परिप्राप्तविवेकेन तत्तुष्टं राम चेतसा ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

मेरे परिज्ञान (तत्त्वज्ञान) से पुरुष ने आनन्दमय हास किया, ऐसा जो मैंने कहा, वह चित्त को, जिसे पूर्ण विवेक हो गया था, आनन्द प्राप्त हुआ