Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
परिप्राप्तविवेकस्य त्यक्तसंसारसंस्थितेः ।
चेतसस्त्यजतो रूपमानन्दो हि विवर्धते ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसे पूर्णरूप से विवेक की
प्राप्ति हो गई है तथा जिसने संसारस्थितिका परित्याग कर दिया है, ऐसे चित्त को अपने
रूपका परित्याग करते महान् आनन्द होता है