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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

हसताङ्गानि दृष्टानि पुंसा यान्युपहासतः । तानि दृष्टानि मनसा विप्रलम्भपदानि ह ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

हँस रहे पुरुष ने उपहासपूर्वक अपने अंग-प्रत्यंग देखे, ऐसा जो मैंने कहा था, उसका यह अर्थ है कि मनने अपनी वंचना के निमित्त लोभ, स्नेह आदि देखे