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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 99, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

कानिचिन्नाभिनन्दन्ति मां विवेकं विमोहतः । मत्तिरस्कारवशतः कूपेष्वेव पतन्त्यधः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

उनमें से कई मन अज्ञानवश विवेकरूप मेरा अभिनन्दन नहीं करते हैँ । विवेकरूप मेरा तिरस्कार करने से यानी विचारकी उपेक्षा करने सेवे कुओं में ही नीचे गिरते हैं