Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अथ वर्षसहस्रेण दिव्येन परमेश्वरः ।
भृगुः परमसंबोधाद्विरराम समाधितः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर देवताओं के हजार वर्ष बीतने पर भगवान
भृगुजी भगवान का साक्षात्कार करानेवाली समाधि से उठे
सर्ग सन्दर्भ
नौवाँ सर्ग समाप्त दसवाँ सर्ग पुत्र का शरीर देखने से भूगुजी का कालके प्रति क्रोध तथा काल का आत्मविद्या से भृगुजी को बोधित करना ।