Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
विज्ञातलोकस्थितयो मुने दृष्टपरावराः ।
हेतुनापि न मुह्यन्ति किं नु हेतुं विनोत्तमाः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिजी, लोक की मर्यादा को
जाननेवाले एवं पूर्वापर व्यवहारों को देखे हुए उत्तम लोग दूसरे से अपराध होने पर भी मोह को प्राप्त नहीं
होते । अपराधरूप हेतु के न रहने पर तो कहना की क्या है ?