Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
त्वमनन्ततपा विप्रो वयं नियतिपालकाः ।
तेन संपूज्यसे पूज्यः साधो नेतरयेच्छया ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, आप महातपस्वी ब्राह्मण
हैं। हम नियम का पालन करनेवाले हैं, हे साधो, आप पूज्य हैं, इसलिए हम आपकी पूजा करते हैं। शाप
के भय आदि से उत्पन्न हुई इच्छा से हम आपकी पूजा नहीं करते