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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

मा तपःक्षपयाऽबुद्धे कल्पकालमहानलैः । यो न दग्धोऽस्मि मे तस्य किं त्वं शापेन धक्ष्यसि ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

हे बुद्धिरहित > मुनिजी, आप तप का नाश न कीजिये जो मैं प्रलयकालरूपी महाग्नियों से भी नहीं जलाया गया, उसको आप अपने शाप से क्या जलायेंगे ?