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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 41

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 41 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 41

संस्कृत श्लोक

स्वकर्मफलपाकोत्थामविचार्य दशां मुने । किं मूर्ख इव सर्वज्ञ मुधा मां शप्तुमिच्छसि ॥ ४१ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुनिजी, अपने कर्म के फल की परिणामरूप दशा का विचार न करके हे सर्वज्ञ, मूर्ख की नाई आप मुझे व्यर्थ शाप देना चाहते हैं