Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
देहिनामिह सर्वेषां शरीरं द्विविधं मुने ।
किं न जानासि तं देहमेकमन्यन्मनोभिधम् ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिजी, आप क्या नहीं जानते हैं कि
यहाँ पर सब प्राणियों के दो प्रकार के शरीर होते हैं | उनमें से एक स्थूल शरीर है और दूसरा मननामक
सूक्ष्म शरीर है