Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verse 43
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
तत्र देहो जडोऽत्यर्थमाविनाशपरायणः ।
मनस्तुच्छं च नियतं कदर्थीक्रियते तव ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
उनमेंसे देह अत्यन्त जड और थोड़े से भी निमित्त से नष्ट होनेवाला है एवं मन
मोक्ष तक स्थिर रहनेवाला और प्रातिभासिक हे । वही आपका मनरूप सूक्ष्म शरीर क्रोध आदिसे पीडित
हो रहा है