Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 10, Verses 71–72
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 10, verses 71–72 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 71,72
संस्कृत श्लोक
वासुदेवाभिधानोऽसौ मुने विप्रकुमारकः ।
जातो मतिमतां मध्ये समधीताखिलश्रुतिः ॥ ७१ ॥
कल्पं विद्याधरो भूत्वा नद्यास्त्वथ महामुने ।
तपश्चरति ते पुत्रः समङ्गायास्तटे स्थितः ॥ ७२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिजी, वह ब्राह्मण का कुमार वासुदेवनाम से उत्पन्न हुआ, विद्वान लोगों के बीच
में उसने समस्त वेदों का अध्ययन किया । हे महामुने, एक कल्प तक विद्याधर होकर वह आपका पुत्र
इस समय समंगा नदी के किनारे बैठ कर तप करता है