Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
त्वयेदानीमहं देव स्मारितस्तनयेहितम् ।
समङ्गायास्तटे तेन दृष्टोऽयं तनयो मया ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे देवाधिदेव, आपने इस
समय मुझे मेरे पुत्र के चरित्र का स्मरण कराया है, इस कारण समंगा नदी के तीर पर योगदृष्टि से मैंने
अपने पुत्र को देखा है