Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
तथा च संभ्रमस्वप्नमिथ्याज्ञानादिभासुराः ।
गन्धर्वनगराकारा दृष्टा मनसि शक्तयः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
मन की असत् पदार्थ के निर्माण की शक्ति सब लोगों के अनुभव से सिद्ध है, ऐसा कहते हैं।
देखिये न भ्रम, स्वप्न, मिथ्याज्ञान आदि से भासुर तथा गन्धर्वनगर के तुल्य आकारवाली शक्तियाँ
मन मे देखी गई हैं