Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
स्थूलदृष्टिदशां त्वेतामवलम्ब्य महामुने ।
पुंसो मनः शरीरं च कायौ द्वाविति कथ्यते ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामुनिजी, इस स्थूल दृष्टि की अवस्था का अवलम्बन कर पुरुष के
मनरूप सूक्ष्मशरीर और स्थूल शरीर दो देह हैं, ऐसा कहा जाता हे