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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

चित्तदेहाङ्गलतया भेदवासनयेद्धया । द्विचन्द्रत्वमिवाज्ञानान्नानातेयं समुत्थिता ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे अज्ञानवश आकाश में द्विचन्द्रता का उदय होता है वैसे ही चित्तरूपी देह की अवयवभूत लता के तुल्य फैल रही बढी-चढी भेदवासना से यह जगत्‌भेद उदित हुआ है