Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
भेदवासनया पश्यत्पदार्थनिचयं मनः ।
भिन्नं पश्यति सर्वत्र घटावटपटादिकम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
भेदवासना से पदार्थ समूह को देख रहा मन सब जगह घट, गर्त, वस्त्र आदि को भिन्न-भिन्न
देखता है