Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
कृशोऽतिदुःखी मूढोऽहमेताश्चान्याश्च भावनाः ।
भावयत्स्वविकल्पोत्थां याति संसारितां मनः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं दुबला-पतला हूँ, मैं बड़ा दुःखी हूँ, मैं मूर्ख हूँ इन भावनाओं की तथा इनसे अतिरिक्त
अन्यान्य अनेक भावनाओं की भावना कर रहा मन अपने ही विकल्प से आविर्भूत हुई संसारिता को
प्राप्त होता है