Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
मननं कृत्रिमं रूपं ममैतन्न यतोऽस्म्यहम् ।
इति तत्त्यागतः शान्तं चेतो ब्रह्म सनातनम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
मन का संसार में आने का क्रम दर्शा कर अब मन की संसार से निवृत्ति का उपाय कहते हैं।
मनन मेरा बनावटी रूप है, कारण कि यह मैं मन ही हूँ, इस प्रकार बनावटी रूप के परित्याग से
चित्त शान्त सनातन ब्रह्म ही है । कृत्रिम मननरूप का त्याग करने पर अकृत्रिम स्वरूप स्थिति स्वयं
अर्थतः प्राप्त है, यह तात्पर्य है