Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
यदीच्छसि मुने द्रष्टुं तं स्वप्नाभं मनोभ्रमम् ।
तत्समुन्मील्य विज्ञाननेत्रमाशु विलोकय ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिजी, यदि आप पुत्रचरित्ररूप पुत्र के मनोभ्रम को, जो स्वप्न के तुल्य है, देखना चाहते
हैं, तो योगदुष्टि को भलीर्भोति खोल कर शीघ्र उसे देखिये