Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्ते जगदीशेन कालेन समदृष्टिना ।
मुनिः संचिन्तयामास ज्ञानाक्ष्णा तनयेहितम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
यों कहने पर महर्षि भृगु ने योगदृष्टि से पुत्र के चरित्र का ध्यान किया