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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

ददर्श च मुहूर्तेन प्रतिभानवशादसौ । पुत्रोदन्तमशेषेण बुद्धिदर्पणबिम्बितम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

उन्होने ध्यानवश एक क्षण में बुद्धिरूपी दर्पण में प्रतिबिम्बित पुत्र के वृत्तान्त को आदि से लेकर अन्त तक सम्पूर्ण देख लिया