Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
नानारूपिण्येकरूपा वैरूप्यशतकारिणी ।
नियतिर्नियताकारा पदार्थमधितिष्ठति ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
अन्य के परित्याग मेँ उपायरूप से सबके अधिष्ठान सन्मात्र का बोध कराते हैं।
नानारूपवाली होने पर भी एकरूपवाली, अपने सैकड़ों विकृतरूप धारण करनेवाली होने पर भी
सदा सर्वत्र एकरूपवाली सत्ता पदार्थों में अधिष्ठानरूप से विद्यमान हे