Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
संपूर्णं खल्विदं ब्रह्म जगद्ब्रह्मैव केवलम् ।
इति भावय यत्नेन ह्यन्यत्सर्वं परित्यज ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सब ब्रह्म ही हे, जगत एकमात्र ब्रह्म ही है, ऐसी भावना प्रयत्नपूर्वक कीजिये ओर
सबका परित्याग कीजिये