Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 53
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 53
संस्कृत श्लोक
विचित्रवर्णता यद्वद्दृश्यते कठिनातपे ।
विचित्रशक्तिता तद्वद्देवेशे सदसन्मयी ॥ ५३ ॥
हिन्दी अर्थ
परिणामवाद के दृष्टान्तों से ब्रह्म से जगत की अभिन्नता का उपपादन कर अव विवर्तवावरे प्रसिद्ध
दृष्टान्त से भी ब्रह्म-जगत के अभेद का उपपादन करते हैं।
जैसे तेज धूप में विचित्र वर्णता दिखाई देती है, वैसे ही परमात्मा मेँ सदसन्मयी विचित्रशक्तिता
है