Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 55
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 55 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 55
संस्कृत श्लोक
अजडाज्जडतोदेति जाड्यभावनहेतुका ।
ऊर्णनाभाद्यथा तन्तुर्यथा पुंसः सुषुप्तता ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
चेतन से अचेतन की उत्पत्ति में भी परिणामवाद और विवर्तवाद इन दोनों वादों के अनुरूप दो
दृष्टान्त कहते हैं।
जैसे चेतन मकड़ी से अचेतन मकड़ी के जाले की उत्पत्ति होती है और जैसे चेतन पुरुष से स्वप्न
के रथ आदि उदित हो ते हैं, वैसे ही अजड़ परमात्मा से जडता की भावनावश जडता उदित होती है