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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 58

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 58

संस्कृत श्लोक

स्वेच्छयात्मात्मनो ब्रह्मन्भावयित्वा स्वकं वपुः । संसारान्मोक्षमाप्नोति स्वालानादिव वारणः ॥ ५८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे हाथी अपने बन्धनस्तम्भ से छुटकारा पाता है वैसे ही आत्मा अपनी इच्छा से अपने पूर्ण स्वरूप का अनुभव कर संसार से मुक्त होता है