Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 59
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
यथैव भावयत्यात्मा सततं भवति स्वयम् ।
तथैवापूर्यते शक्त्या शीघ्रमेव महानपि ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा सदा जैसी भावना
करता है, स्वयं वैसा हो जाता है और महान होता हुआ भी मन की शक्ति से वैसा पूर्ण हो जाता
है