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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 11, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

नानाकारविकाराढ्या सत्येवासत्यरूपिणी । विभ्रमं जनयत्येषा धीरस्यापि जगत्स्थितिः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

तरह-तरह के विकारों से भरी हुई ओर असत्य स्वरूपवाली यह जगत्‌ स्थिति सत्य-सी प्रतीत होती हुई विद्वान को भी भ्रमयुक्त करती है