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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 12, Verse 10

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 12, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 10

संस्कृत श्लोक

काश्चिचत्तृणवदुह्यन्ते दूरे ब्रह्ममहोदधेः । अप्राप्तभूमिका एता यथोरगनगादयः ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

कुछ जीव शास्त्रप्रतिकूल प्रवृत्ति से ब्रह्मरूपी महासागर के यानी मुक्ति से दूर बहाये जाते है, उन्हें भूमिका प्राप्त नहीं होती है। वे हैं सर्प, वृक्ष आदि