Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 13, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
स्वया वासनया लोको यद्यत्कर्म करोति यः ।
स तथैव तदाप्नोति नेतरस्येह कर्तृता ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
जो आदमी अपनी वासना से जो जो कर्म करता है, वह वैसे ही
उसको प्राप्त होता है, उसमें अन्य किसी की कर्तृता नहीं है