Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 13, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
मनःशरीरेण तव पुत्रोऽयं कृतवान्मुने ।
तदेव प्राप्तवानाशु वयं नात्रापराधिनः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुनिजी, आपके पुत्र ने मनरूपी शरीरसे जो कुछ किया, उसी को वह प्राप्त हुआ । इस विषय में
हमारा तनिक भी अपराध नहीं है