Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 13, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
ये सर्गा नरकाभोगा या जन्ममरणैषणाः ।
स्वप्नमनोमननेनेदं स निष्पन्दोऽपि दुःखदः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
जो सृष्टियाँ, जो
नरकों के विस्तार ओर जो जन्म-मरण की इच्छाएँ हैं, वे सब मनके स्फुरण से हैं, वह मन का किंचिन्मात्र
स्फुरण भी दुःखदायी है