Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 13, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
लोके प्रबुध्यमानानां भूतानामात्मसिद्धये ।
विहरन्तीह शास्त्राणि कल्पितान्युदितात्मभिः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
वे किस लिए देहधारण करते हैं ? ऐसी यदि शंका हो तो उस पर शास्त्र-रचना द्वारा अज्ञानियों के
उद्धार के लिए ही वे देहधारण करते हैं, इस आशय से कहते हैं।
लोक में जो लोग आत्मज्ञान के लिए जागरूक हैं, उन प्राणियों की आत्मज्ञान की सिद्धि के लिए
ज्ञानी महात्माओं द्वारा रचे गये शास्त्र इस संसार में विहार करते हैं, गरजते हैं